Silver Price Crash: चांदी आज यानी, सोमवार 29 दिसंबर को क्रैश हो गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर हाई बनाने के बाद दाम 8% या करीब ₹21,000 प्रति किलो तक गिर गए।
चांदी सुबह 2.39 लाख रुपए पर खुली थी फिर 2.54 लाख रुपए के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गई। बाद में अचानक लुढ़क कर 2.33 लाख रुपए पर आ गई।
Silver Rate Falls
एक्सपर्ट्स के मुताबिक तेजी से चढ़ी कीमतों में गिरावट की वजह जियोपॉलिटिकल तनाव कम होने के संकेत से लेकर टेक्निकल फैक्टर्स हैं। मार्जिन बढ़ना भी एक वजह है।
Silver Price Crash: एक ही दिन में ₹21000 गिर गया चांदी का भाव, ये 5 कारण हैं जिम्मेदार
Silver Price Crash: MCX पर चांदी एक ही दिन में 21,000 रुपये टूट गई, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया। रिकॉर्ड हाई के बाद अचानक आई भारी गिरावट से निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। आखिर क्या वजह रही इस तेज क्रैश की, जानिए इसके पीछे के 5 बड़े कारण।
चांदी अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रही थी।
Silver Price Crash: चांदी के भाव में सोमवार को भारी गिरावट आई। चांदी की कीमत MCX पर करीब 21,000 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गई। मुनाफा काटने के लिए निवेशकों की भारी बिकवाली हुई। MCX Silver March फ्यूचर्स गिरकर इंट्रा डे में 2,33,120 रुपये प्रति किलो के निचले स्तर तक आ गया।
इसी सत्र में चांदी गिरावट से पहले 2,54,174 रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड हाई बना चुकी थी। लेकिन, फिर यह गिरकर 2,22,504 रुपये तक आ गई। वैश्विक बाजार में भी यही तस्वीर रही। सोमवार को पहली बार चांदी कुछ देर के लिए 80 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई, लेकिन वहां टिक नहीं पाई। शाम 9 बजे तक चांदी चांदी 10% से ज्यादा गिरावट के साथ 71 डॉलर तक आ गई थी।
2025 में अब तक चांदी करीब 181 प्रतिशत चढ़ चुकी है। इसने सोने के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। चांदी में जबरदस्त रैली देखने के पीछे कुछ ठोस कारण जिम्मेदार रहे। जैसे कि अमेरिका में इसे क्रिटिकल मिनरल का दर्जा मिलना, सप्लाई का सीमित रहना, स्टॉक्स का लगातार घटना, इंडस्ट्रियल इस्तेमाल बढ़ना और निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी।
रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद मुनाफावसूली
आज सुबह चांदी रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गई थी। MCX पर भाव करीब 2.54 लाख रुपये प्रति किलो तक चले गए। जब कोई कमोडिटी इतनी ऊंचाई पर पहुंचती है, तो निवेशक स्वाभाविक रूप से मुनाफा निकालने लगते हैं। यही आज हुआ।
जैसे ही निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू किया, भारी बिकवाली आई और नतीजा यह रहा कि एक ही दिन में करीब 21,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट देखने को मिली।
ग्लोबल मार्केट से भी आया दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी में भारी उतार-चढ़ाव दिखा। आज पहली बार चांदी कुछ समय के लिए 80 डॉलर प्रति औंस के ऊपर चली गई, लेकिन वहां टिक नहीं पाई। थोड़ी ही देर में भाव फिसलकर 71 डॉलर तक आ गए।
जब ग्लोबल मार्केट में इस तरह की तेज बिकवाली आती है, तो उसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है। इसी वजह से MCX पर भी चांदी के दाम तेजी से नीचे आए।
भू-राजनीतिक तनाव में कमी
चांदी को आमतौर पर सोने की तरह सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब दुनिया में तनाव बढ़ता है, युद्ध या अनिश्चितता होती है, तो निवेशक चांदी और सोने जैसी धातुओं की तरफ भागते हैं। लेकिन आज तस्वीर थोड़ी बदली हुई थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर शांति की संभावनाओं पर सकारात्मक संकेत मिले। अमेरिका और यूक्रेन के नेताओं के बीच बातचीत में प्रगति की खबरें आईं। जैसे ही बाजार को लगा कि जियोपॉलिटिकल टेंशन कुछ कम हो सकती है, वैसे ही सेफ हेवन एसेट्स से पैसा निकलने लगा। इसका सीधा असर चांदी की कीमतों पर पड़ा।
मार्जिन बढ़ने से ट्रेडर्स पर दबाव
आज की गिरावट की एक अहम वजह मार्जिन बढ़ाया जाना भी रही। CME ग्रुप, जो COMEX और दूसरे बड़े डेरिवेटिव प्लेटफॉर्म चलाता है, उसने सिल्वर फ्यूचर्स पर मार्जिन बढ़ा दिया है। पहले जहां ट्रेडर्स को करीब 20,000 डॉलर मार्जिन देना पड़ता था, अब यह बढ़कर 25,000 डॉलर के आसपास हो गया है।
मार्जिन बढ़ने का मतलब यह है कि ट्रेडर्स को ज्यादा कैश लगाना पड़ेगा। ऐसे में कई ट्रेडर्स मजबूरी में अपनी पोजिशन काटते हैं, जिससे बाजार में बिकवाली और तेज हो जाती है।
तेजी के बाद करेक्शन आना तय
पिछले कुछ महीनों में चांदी में असाधारण तेजी देखने को मिली है। इस साल अब तक चांदी करीब 181 प्रतिशत चढ़ चुकी थी। पिछले एक साल में ही भाव लगभग तीन गुना हो गए थे। जब किसी एसेट में इतनी तेज रैली आती है, तो एक समय के बाद करेक्शन आना लगभग तय माना जाता है। आज वही करेक्शन अचानक और तेज तरीके से देखने को मिला।
टेक्निकल वजहें भी जिम्मेदार
टेक्निकल चार्ट्स की बात करें तो चांदी अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रही थी। ऐसे हालात में छोटे-छोटे ट्रिगर भी बड़ी गिरावट की वजह बन जाते हैं। इसके अलावा मनोवैज्ञानिक फैक्टर भी काम करता है।
जब भाव बहुत ऊपर चले जाते हैं, तो बाजार में यह डर बनने लगता है कि कहीं टॉप न बन जाए। इसी डर में लोग जल्दी-जल्दी बेचने लगते हैं और गिरावट और तेज हो जाती है।
टेक्निकल चार्ट क्या संकेत दे रहे हैं
टेक्निकल नजर से देखें तो चांदी इस वक्त अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज से करीब 89 प्रतिशत ऊपर ट्रेड कर रही है। BTIG का कहना है कि 1979 में हंट ब्रदर्स के स्क्वीज को छोड़ दें, तो जब भी चांदी 200-DMA से 60 प्रतिशत से ज्यादा ऊपर गई है, उसके बाद 20, 30 और 40 दिनों में कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
फर्म के मुताबिक, भले ही इस बार फंडामेंटल कहानी अलग हो, लेकिन साल की शुरुआत से अब तक करीब 174 प्रतिशत की तेजी में ज्यादातर पॉजिटिव फैक्टर पहले ही दामों में शामिल हो चुके हैं।
चांदी का भाव क्यों गिर रहा है(Why is the price of silver falling?)?
चांदी की कीमतों में गिरावट एक्सचेंज ऑपरेटर सीएमई ग्रुप द्वारा चांदी पर उच्च मार्जिन आवश्यकताओं को लागू करने के बाद हुई है, जिसके बारे में चाइना फ्यूचर्स लिमिटेड के विश्लेषक वांग यानकिंग ने ब्लूमबर्ग को बताया कि इससे सट्टा खरीद को कम करने में मदद मिलेगी।
Why is the silver price falling?
Why is the silver price falling? Sinks further below the(today silver price) …
Silver prices are falling due to a combination of profit-taking after recent rallies, fading expectations for immediate US interest rate cuts (strengthening the dollar), easing US-China trade tensions, and increased physical metal availability in major hubs like London, offsetting strong long-term demand from industrial uses like EVs and solar panels.
क्या 2026 में चांदी चढ़ेगी(Will silver rise in 2026?)?
सारांश। संक्षेप में, चांदी की कीमतें 2026 में भी ऊंची बनी रह सकती हैं , लेकिन इस तेजी को और आगे बढ़ाने के लिए या तो आपूर्ति पर फिर से दबाव बढ़ेगा या केंद्रीय बैंकों को स्पष्ट रूप से नरम रुख अपनाना होगा।
What does Elon Musk say about silver?
Elon Musk warns of impact of record silver prices before …
Silver is needed in many industrial processes,” Musk posted on X(today silver price). Uses for the metal include in electrification, solar power panels, electric vehicles, and data centres, all areas in which demand has been rising, eating into silver inventories.
चांदी के लिए 80 50 नियम क्या है?
80/50 का नियम सोने-चांदी के अनुपात पर आधारित एक रणनीतिक निवेश रणनीति है। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के मूल्य के बराबर चांदी की कितनी मात्रा होती है । बाजार की स्थितियों(Silver Intraday Slump), आर्थिक माहौल और दोनों धातुओं की आपूर्ति-मांग के आधार पर यह अनुपात लगातार बदलता रहता है।
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